अनाज · फल-सब्ज़ी · स्क्रैप

एक ख़रीदार के भाव पर
मत बेचिए

माल की फ़ोटो डालिए, बंद होने का समय तय कीजिए, और कई ख़रीदारों से बोली लगवाइए। सबसे ऊँची बोली आपके सामने — आप चाहें तो बेचिए, न चाहें तो रहने दीजिए।

फ़ोन से चलता है। कोई ऐप नहीं, कोई कंप्यूटर नहीं।

आज क्या होता है

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दो-तीन जाने-पहचाने ख़रीदार

वही आढ़ती, वही भाव। चौथा आदमी शायद ज़्यादा देता, पर उस तक बात पहुँची ही नहीं।

माल रुका तो नुक़सान

सब्ज़ी और फल एक दिन में गिर जाते हैं। भाव के इंतज़ार में रखा माल अक्सर सस्ता ही बिकता है।

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भाव किसी को पता नहीं

न आपको पता कि आज असल भाव क्या है, न ख़रीदार को पता कि कोई और कितना दे रहा है।

चार क़दम, पाँच मिनट

  1. माल डालिएक्या है, कितना है, कहाँ रखा है। दो फ़ोटो काफ़ी हैं।
  2. समय तय कीजिएआज शाम चार बजे तक, या दो घंटे — जैसा आपका माल हो।
  3. ख़रीदार बोली लगाते हैंसबको एक ही समय में, एक ही माल पर। हर बोली आपके फ़ोन पर।
  4. आप तय कीजिएसबसे ऊँची बोली दिखती है। बेचना है या नहीं — फ़ैसला आपका।

किनके लिए

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अनाज मंडी

गेहूँ, धान, सरसों, चना, मक्का। लॉट बनाइए, नमी और क्वालिटी लिखिए, बोली लगवाइए।

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फल-सब्ज़ी मंडी

जल्दी ख़राब होने वाला माल। दो घंटे की बोली भी चलती है — माल रुकने से पहले बिक जाए।

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स्क्रैप कारोबार

लोहा, प्लास्टिक, काग़ज़, ई-वेस्ट। वज़न और ग्रेड के साथ लॉट, और कई कबाड़ियों की बोली।

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आढ़ती और व्यापारी

ख़रीदना हो तो उल्टी बोली — कई बेचने वाले भाव नीचे लाते हैं।

ख़रीदने वाले हैं?

अपने इलाक़े और अपने माल की बोलियाँ फ़ोन पर देखिए। जो चाहिए उसी पर बोली लगाइए — मंडी जाने से पहले पता रहेगा कि क्या आ रहा है।

साफ़-साफ़ बात

हम माल नहीं ख़रीदते सौदा आपके और ख़रीदार के बीच होता है। हम सिर्फ़ बोली की जगह देते हैं।
पैसे का लेन-देन आपके बीच भुगतान आप जैसे करते आए हैं वैसे ही होगा। हम बीच में पैसा नहीं रखते।
बेचना ज़रूरी नहीं बोली पसंद न आए तो मना कर दीजिए। कोई जुर्माना नहीं।
आपका भाव आपका आपकी बोलियाँ और भाव किसी दूसरे व्यापारी को नहीं दिखाए जाते।
मंडी के नियम आप पर लागू रहेंगे APMC या स्थानीय मंडी के जो नियम आप पर लगते हैं, वो वैसे ही रहेंगे। हम उनका विकल्प नहीं हैं।
अभी शुरुआत है हर मंडी में ख़रीदार अभी नहीं हैं। आपके इलाक़े में कितने हैं — पूछिए, सही बता देंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इसके लिए कंप्यूटर चाहिए?

नहीं। साधारण स्मार्टफ़ोन से चलता है। फ़ोटो खींचिए, भाव और समय लिखिए, बस।

क्या मुझे बेचना ही पड़ेगा?

नहीं। बोलियाँ देखने के बाद फ़ैसला आपका है। भाव कम लगे तो मना कर दीजिए — कोई जुर्माना नहीं।

पैसा कैसे आएगा?

भुगतान आपके और ख़रीदार के बीच होता है, जैसे अभी होता है। हम पैसे बीच में नहीं रखते।

क्या मेरा भाव दूसरों को दिख जाएगा?

ख़रीदारों को आपका माल दिखता है। दूसरे व्यापारियों को आपकी बोलियाँ या आपका भाव नहीं दिखाया जाता।

सब्ज़ी जल्दी ख़राब होती है, इतना समय कहाँ?

बोली का समय आप तय करते हैं। दो घंटे भी रख सकते हैं। जल्दी ख़राब होने वाले माल के लिए यही ठीक रहता है।

स्क्रैप का वज़न और ग्रेड कैसे तय होगा?

वज़न और ग्रेड आप लिखते हैं, फ़ोटो के साथ। ख़रीदार उसी आधार पर बोली लगाता है। तौल आपकी जगह पर, जैसे अभी होती है।

क्या ये मंडी के नियमों के ख़िलाफ़ है?

नहीं। जो नियम आप पर अभी लागू हैं, वो वैसे ही रहेंगे। ये मंडी की जगह नहीं लेता — सिर्फ़ ख़रीदारों तक बात पहुँचाने का तरीक़ा है।

कितना ख़र्च आएगा?

शुरू करने में कुछ नहीं। आपके काम और माल के हिसाब से बात करके तय करते हैं — पहले बताकर, बाद में नहीं।

एक बार बोली लगवा कर देख लीजिए

एक लॉट पर आज़माइए। भाव बेहतर न मिले तो कुछ नहीं गया।